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प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना 2026: ऑनलाइन आवेदन, प्रीमियम, पात्रता और नए नियम

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026: PMFBY आवेदन, क्लेम, प्रीमियम और अंतिम तिथि

प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना 2026: ऑनलाइन आवेदन, प्रीमियम, पात्रता, फसल नुकसान क्लेम और नए नियम

खेती हमेशा मौसम, प्राकृतिक आपदाओं, कीटों, रोगों और बाजार से जुड़े जोखिमों के बीच की जाती है। किसान बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कृषि उपकरणों पर बड़ी राशि खर्च करता है, लेकिन सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, चक्रवात, जलभराव या बेमौसम बारिश कुछ ही समय में पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे जोखिमों से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना, जिसका आधिकारिक नाम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना—PMFBY है, चलाई जा रही है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केंद्र सरकार द्वारा समर्थित फसल बीमा कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य अप्रत्याशित घटनाओं के कारण अधिसूचित फसल को होने वाले नुकसान पर पात्र किसानों को वित्तीय सहायता देना, कृषि आय को स्थिर रखने में मदद करना, खेती की निरंतरता बनाए रखना और कृषि क्षेत्र में ऋण प्रवाह को प्रोत्साहित करना है। योजना खाद्यान्न, तिलहन तथा कुछ वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों को कवर कर सकती है, लेकिन किसी किसान की फसल तभी बीमित होगी जब उसका राज्य, क्षेत्र और फसल संबंधित मौसम के लिए अधिसूचित हो।

2026 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित कई महत्वपूर्ण बदलाव और राज्य-स्तरीय घोषणाएं सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ 2026 और रबी 2026-27 के लिए पूरे प्रदेश में PMFBY और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। राजस्थान में बीमा कंपनियों की जवाबदेही, गलत फसल विवरण, किसान की सहमति, क्लस्टर आधारित निविदा और समय पर दावा भुगतान को लेकर नए निर्देश सामने आए हैं। मध्य प्रदेश में खरीफ 2026 की अधिसूचित फसलों के लिए कुछ जिलों में 15 अगस्त 2026 तक बीमा कराने की सूचना दी गई है।

किसानों को यह समझना जरूरी है कि आवेदन की अंतिम तारीख पूरे भारत में एक जैसी नहीं होती। अंतिम तिथि, बीमा कंपनी, अधिसूचित फसल, बीमित राशि और प्रति हेक्टेयर प्रीमियम राज्य, जिला और फसल के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए किसी भी तारीख को राष्ट्रीय अंतिम तिथि मानने के बजाय अपने राज्य की अधिसूचना और आधिकारिक PMFBY पोर्टल की जानकारी जरूर जांचें।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या है?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को अधिसूचित प्राकृतिक और कृषि जोखिमों के कारण फसल में होने वाले नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने वाली बीमा योजना है। इसे वर्ष 2016 में शुरू किया गया था और बाद में योजना के परिचालन नियमों में कई बदलाव किए गए। वर्ष 2020 में योजना को संशोधित किए जाने के बाद किसानों की भागीदारी स्वैच्छिक कर दी गई।

इस योजना में किसान निर्धारित कम प्रीमियम जमा करता है। वास्तविक बीमांकिक प्रीमियम का शेष पात्र हिस्सा केंद्र और संबंधित राज्य सरकार द्वारा प्रीमियम सब्सिडी के रूप में वहन किया जा सकता है।

फसल खराब होने पर किसान को उसके कुल खर्च या बाजार में मिलने वाली संभावित आय का पूरा भुगतान स्वतः नहीं मिलता। बीमा दावा अधिसूचित फसल, बीमित क्षेत्र, बीमित राशि, नुकसान के प्रकार, उपज आंकड़ों, सर्वेक्षण और लागू परिचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होता है।

योजना का मुख्य उद्देश्य

प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य केवल नुकसान के बाद पैसा देना नहीं है। इसके व्यापक उद्देश्यों में प्राकृतिक या अप्रत्याशित घटनाओं से प्रभावित किसानों को वित्तीय समर्थन देना, खेती से होने वाली आय को स्थिर रखने में मदद करना, किसानों को कृषि कार्य जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का विश्वास देना शामिल है।

यह योजना कृषि ऋण प्रणाली को भी सहयोग देती है। फसल बीमा उपलब्ध होने से किसान और ऋण देने वाली संस्था दोनों को उत्पादन जोखिम के विरुद्ध कुछ वित्तीय सुरक्षा मिल सकती है।

योजना के आधिकारिक FAQ के अनुसार PMFBY टिकाऊ कृषि उत्पादन, किसान की आय स्थिरता, आधुनिक कृषि पद्धतियों और कृषि क्षेत्र में ऋण प्रवाह को बढ़ावा देने का प्रयास करती है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026 का संक्षिप्त विवरण

योजना का विवरण जानकारी
योजना का नाम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
अंग्रेजी नाम Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana
संक्षिप्त नाम PMFBY
संबंधित मंत्रालय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार
लाभार्थी अधिसूचित फसल उगाने वाले पात्र किसान
भागीदारी किसानों के लिए स्वैच्छिक
खरीफ प्रीमियम बीमित राशि का अधिकतम 2 प्रतिशत या बीमांकिक दर, जो कम हो
रबी प्रीमियम बीमित राशि का अधिकतम 1.5 प्रतिशत या बीमांकिक दर, जो कम हो
वार्षिक वाणिज्यिक/बागवानी फसल अधिकतम 5 प्रतिशत या बीमांकिक दर, जो कम हो
आवेदन माध्यम आधिकारिक पोर्टल, बैंक, CSC या अधिकृत संस्था
फसल नुकसान हेल्पलाइन 14447
आधिकारिक पोर्टल pmfby.gov.in

आधिकारिक PMFBY पोर्टल पर किसान स्वयं बीमा आवेदन, प्रीमियम कैलकुलेटर, आवेदन स्थिति, शिकायत और फसल नुकसान रिपोर्टिंग जैसी सुविधाओं तक पहुंच सकते हैं। पोर्टल पर किसान सहायता के लिए 14447 हेल्पलाइन भी प्रदर्शित की गई है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कितना प्रीमियम देना होता है?

योजना के अंतर्गत किसान द्वारा देय अधिकतम प्रीमियम फसल के मौसम और प्रकार के अनुसार निर्धारित होता है।

खरीफ फसलों के लिए प्रीमियम

खरीफ मौसम की खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए किसान को बीमित राशि का अधिकतम 2 प्रतिशत या वास्तविक बीमांकिक प्रीमियम दर—दोनों में जो कम हो—देना होता है।

खरीफ की फसलों में राज्य की अधिसूचना के अनुसार धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, सोयाबीन, तुअर, मूंग, उड़द, मूंगफली और अन्य फसलें शामिल हो सकती हैं।

रबी फसलों के लिए प्रीमियम

रबी मौसम की खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए किसान का अधिकतम हिस्सा बीमित राशि का 1.5 प्रतिशत या बीमांकिक दर में जो कम हो, निर्धारित है।

रबी में गेहूं, चना, सरसों, मसूर, जौ और अन्य राज्य-अधिसूचित फसलें शामिल हो सकती हैं।

वाणिज्यिक और बागवानी फसलों का प्रीमियम

अधिसूचित वार्षिक वाणिज्यिक और वार्षिक बागवानी फसलों के लिए किसान का अधिकतम प्रीमियम बीमित राशि का 5 प्रतिशत या बीमांकिक दर में जो कम हो सकता है।

यह प्रीमियम संरचना आधिकारिक PMFBY FAQ में दी गई है।

प्रति हेक्टेयर प्रीमियम अलग क्यों होता है?

हालांकि प्रीमियम प्रतिशत राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित है, लेकिन प्रति हेक्टेयर किसान द्वारा दी जाने वाली वास्तविक राशि हर फसल में अलग हो सकती है। इसका कारण प्रति हेक्टेयर बीमित राशि या Scale of Finance का अलग होना है।

उदाहरण के लिए मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से संबंधित खरीफ 2026 सूचना में निम्न किसान प्रीमियम बताए गए हैं:

फसल किसान प्रीमियम प्रति हेक्टेयर
सोयाबीन ₹926
मक्का ₹740
तुअर/अरहर ₹778
कपास ₹3,000

ये राशि पूरे भारत या पूरे मध्य प्रदेश के लिए स्वतः लागू नहीं मानी जानी चाहिए। यह संबंधित क्षेत्र और अधिसूचना से जुड़ा उदाहरण है। किसान अपने जिले और फसल के लिए आधिकारिक प्रीमियम कैलकुलेटर या स्थानीय कृषि विभाग से राशि सत्यापित करें।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कौन आवेदन कर सकता है?

अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल उगाने वाले पात्र किसान योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसमें भूमि स्वामी किसान और लागू नियमों के अनुसार बटाईदार या किरायेदार किसान शामिल हो सकते हैं, बशर्ते उनके पास खेती और बुआई से संबंधित निर्धारित प्रमाण हों।

ऋणी, गैर-ऋणी और डिफॉल्टर किसान भी संबंधित राज्य की अधिसूचना और पात्रता शर्तों के अनुसार बीमा करा सकते हैं।

किसान के पास केवल कृषि भूमि होना पर्याप्त नहीं है। जिस फसल का बीमा कराया जा रहा है, वही फसल वास्तविक रूप से संबंधित खेत में बोई गई होनी चाहिए और पोर्टल पर भूमि, क्षेत्रफल तथा फसल का विवरण सही दर्ज होना चाहिए।

योजना में शामिल होने से पहले ये बातें जांचें

किसान को आवेदन से पहले निम्न जानकारी सत्यापित करनी चाहिए:

  • उसका जिला और बीमा इकाई योजना के अंतर्गत अधिसूचित है या नहीं।

  • बोई गई फसल वर्तमान मौसम के लिए अधिसूचित है या नहीं।

  • आवेदन की अंतिम तिथि क्या है।

  • किस बीमा कंपनी को क्षेत्र आवंटित किया गया है।

  • प्रति हेक्टेयर बीमित राशि कितनी है।

  • किसान को कितना प्रीमियम जमा करना है।

  • फसल नुकसान की सूचना किस माध्यम से देनी होगी।

सभी फसलें और सभी जिले स्वतः PMFBY के अंतर्गत शामिल नहीं होते। राज्य सरकारें मौसमवार अधिसूचना जारी करती हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए जरूरी दस्तावेज

आवेदन में मांगे जाने वाले दस्तावेज राज्य और किसान की स्थिति के अनुसार बदल सकते हैं। सामान्य रूप से निम्न दस्तावेज उपयोगी होते हैं:

  • आधार कार्ड

  • सक्रिय मोबाइल नंबर

  • बैंक पासबुक

  • बैंक खाते का विवरण

  • खसरा-खतौनी या भूमि रिकॉर्ड

  • फसल बुआई प्रमाण पत्र

  • किसान पहचान या Farmer ID, जहां लागू हो

  • पासपोर्ट आकार का फोटो

  • किरायेदार या बटाईदार किसान के लिए अनुबंध या शपथ पत्र

  • भूमि क्षेत्र और फसल संबंधी घोषणा

  • किसान क्रेडिट कार्ड का विवरण, यदि लागू हो

मध्य प्रदेश की 2026 सूचना में आधार, खसरा-खतौनी, बुआई प्रमाण पत्र, किरायेदार किसान के लिए समझौता या शपथ पत्र तथा बैंक पासबुक की प्रति का उल्लेख किया गया है।

किसान को आवेदन जमा करने से पहले यह देखना चाहिए कि बैंक खाते में नाम और आधार का नाम मेल खाता है। गलत बैंक खाता, IFSC, फसल नाम या भूमि क्षेत्र दर्ज होने से पॉलिसी और क्लेम में समस्या आ सकती है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

किसान आधिकारिक PMFBY पोर्टल के Farmer Corner से स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। इसके अलावा संबंधित बैंक शाखा, कॉमन सर्विस सेंटर, सहकारी संस्था या अधिसूचना में बताई गई अधिकृत संस्था के माध्यम से भी आवेदन संभव हो सकता है।

चरण 1: आधिकारिक पोर्टल खोलें

सबसे पहले प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं।

केवल आधिकारिक वेबसाइट या राज्य द्वारा अधिकृत आवेदन माध्यम का उपयोग करें। किसी अनजान वेबसाइट, सोशल मीडिया लिंक या व्यक्ति के निजी UPI खाते में प्रीमियम न भेजें।

चरण 2: Farmer Corner चुनें

किसान स्वयं आवेदन करना चाहता है तो Farmer Application Form खोल सकता है।

नए किसान को मोबाइल नंबर, पहचान और मांगी गई जानकारी के आधार पर पंजीकरण पूरा करना होगा।

चरण 3: किसान का व्यक्तिगत विवरण भरें

नाम, पिता या पति का नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर, पता और बैंक विवरण सही भरें।

जानकारी आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार होनी चाहिए।

चरण 4: भूमि और फसल विवरण भरें

खेत का सर्वे नंबर, खसरा नंबर, कुल क्षेत्र, बीमित क्षेत्र, सिंचित या असिंचित स्थिति और वास्तविक बोई गई फसल सही दर्ज करें।

यदि किसान एक से अधिक खेत या फसल का बीमा करा रहा है तो हर रिकॉर्ड को अलग-अलग जांचें।

चरण 5: दस्तावेज अपलोड करें

आधार, बैंक पासबुक, भूमि रिकॉर्ड, बुआई प्रमाण पत्र और मांगे गए अन्य दस्तावेज स्पष्ट PDF या इमेज में अपलोड करें।

चरण 6: प्रीमियम जांचें

आवेदन जमा करने से पहले पोर्टल पर दिख रही बीमित राशि और किसान प्रीमियम को जांचें।

चरण 7: भुगतान और अंतिम सबमिशन

निर्धारित प्रीमियम जमा करके आवेदन अंतिम रूप से सबमिट करें।

चरण 8: रसीद और पॉलिसी सुरक्षित रखें

आवेदन संख्या, भुगतान रसीद और पॉलिसी की कॉपी डाउनलोड करके रखें।

पॉलिसी में फसल, क्षेत्र, भूमि और बैंक विवरण गलत हो तो तुरंत बैंक, बीमा कंपनी या कृषि विभाग से संपर्क करें।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना आवेदन की स्थिति कैसे जांचें?

किसान आधिकारिक पोर्टल पर पॉलिसी या आवेदन पहचान संख्या के आधार पर Application Status जांच सकता है। पोर्टल आवेदन से लेकर पॉलिसी और क्लेम प्रक्रिया तक की डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास करता है।

स्थिति जांचते समय निम्न विवरण सामने आ सकते हैं:

  • आवेदन प्राप्त हुआ

  • दस्तावेज सत्यापन लंबित

  • प्रीमियम भुगतान प्राप्त

  • बैंक सत्यापन लंबित

  • पॉलिसी जारी

  • आवेदन अस्वीकृत

  • क्लेम सूचना प्राप्त

  • सर्वेक्षण लंबित

  • दावा स्वीकृत

  • भुगतान जारी

किसान आवेदन की केवल रसीद देखकर यह न माने कि बीमा पॉलिसी सफलतापूर्वक जारी हो गई है। अंतिम पॉलिसी दस्तावेज जरूर जांचें।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किन नुकसानों का कवर मिलता है?

PMFBY विभिन्न प्रकार के अधिसूचित जोखिमों को कवर कर सकती है। कवर का अंतिम दायरा राज्य की अधिसूचना और लागू परिचालन दिशा-निर्देशों पर निर्भर करता है।

1. खड़ी फसल की उपज में नुकसान

अधिसूचित क्षेत्र में खड़ी फसल को निम्न गैर-निवारणीय जोखिमों से होने वाली उपज हानि कवर की जा सकती है:

  • प्राकृतिक आग और बिजली गिरना

  • तूफान और ओलावृष्टि

  • चक्रवात

  • बाढ़ और जलभराव

  • भूस्खलन

  • सूखा और लंबे शुष्क अंतराल

  • कीट और रोग

  • अन्य अधिसूचित प्राकृतिक जोखिम

क्षेत्र आधारित उपज दावे में किसान के खेत का अकेला उत्पादन हमेशा आधार नहीं होता। अधिसूचित बीमा इकाई की वास्तविक और सीमा उपज के आधार पर दावा गणना की जा सकती है।

2. बाधित या निष्फल बुआई

यदि प्रतिकूल मौसम के कारण अधिसूचित क्षेत्र के अधिकांश बीमित किसान बुआई या रोपाई नहीं कर पाते, तो नियमों के अनुसार बीमित राशि के अधिकतम 25 प्रतिशत तक का दावा उपलब्ध हो सकता है।

किसान द्वारा केवल यह कहना कि उसने बुआई नहीं की, पर्याप्त नहीं होता। क्षेत्र, मौसम, सरकारी अधिसूचना और बीमा नियमों के आधार पर पात्रता तय होती है।

3. मध्य-मौसम प्रतिकूलता

फसल की बढ़वार के दौरान गंभीर सूखा, बाढ़, लंबे शुष्क अंतराल या अन्य अधिसूचित परिस्थितियों से उत्पादन की संभावना बहुत कम हो जाए तो मध्य-मौसम प्रतिकूलता का प्रावधान लागू हो सकता है।

इसका निर्धारण क्षेत्रीय स्थिति और सरकारी/बीमा आकलन के आधार पर होता है।

4. स्थानीय आपदा

ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलभराव और अन्य अधिसूचित स्थानीय घटनाओं से किसी विशेष बीमित खेत को नुकसान होने पर व्यक्तिगत खेत के आधार पर सर्वे किया जा सकता है।

स्थानीय नुकसान की सूचना किसान को निर्धारित समय में देनी होती है।

5. कटाई के बाद नुकसान

कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए निर्धारित “कट एंड स्प्रेड” स्थिति में रखी अधिसूचित फसल को चक्रवाती बारिश या बेमौसम बारिश से नुकसान होने पर अधिकतम 14 दिनों तक पोस्ट-हार्वेस्ट कवर उपलब्ध हो सकता है।

सभी परिस्थितियों में खेत में रखी हर कटाई की उपज कवर नहीं होती। कवर केवल अधिसूचित जोखिम, फसल की निर्धारित अवस्था और समय सीमा के अनुसार मिलता है।

2026 में जंगली जानवरों के नुकसान का नया प्रावधान

केंद्र सरकार ने खरीफ 2026 से जंगली जानवरों के हमले से होने वाली फसल क्षति को स्थानीय जोखिम श्रेणी के अंतर्गत पांचवें Add-on Cover के रूप में शामिल करने का ढांचा घोषित किया है।

लेकिन इसका लाभ पूरे देश में हर किसान को स्वतः नहीं मिलेगा। संबंधित राज्य को नुकसान करने वाले जंगली जानवरों की सूची और संवेदनशील जिलों या बीमा इकाइयों को अधिसूचित करना होगा।

किसान को नुकसान की सूचना 72 घंटे के अंदर Crop Insurance App के माध्यम से जियोटैग फोटो सहित देनी होगी।

यह प्रावधान विशेष रूप से जंगल, वन्यजीव गलियारे और पहाड़ी क्षेत्रों के पास खेती करने वाले किसानों के लिए उपयोगी हो सकता है।

फसल नुकसान की सूचना 72 घंटे में कैसे दें?

स्थानीय आपदा, कटाई के बाद नुकसान या लागू व्यक्तिगत दावे में किसान को घटना के 72 घंटे के भीतर सूचना देनी चाहिए।

सूचना निम्न माध्यमों से दी जा सकती है:

  • Crop Insurance App

  • केंद्रीय हेल्पलाइन

  • संबंधित बीमा कंपनी का टोल-फ्री नंबर

  • बैंक शाखा

  • कॉमन सर्विस सेंटर

  • स्थानीय कृषि विभाग

  • जिला अधिकारी या अधिकृत सरकारी कर्मचारी

आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देश Crop Insurance App और केंद्रीकृत हेल्पलाइन को प्राथमिक माध्यम मानते हैं। किसान को फसल, सर्वे नंबर, प्रभावित क्षेत्र, घटना की तारीख और नुकसान का विवरण देना चाहिए।

नुकसान की सूचना देते समय क्या तैयार रखें?

किसान निम्न विवरण तैयार रखे:

  • पॉलिसी नंबर

  • आवेदन नंबर

  • किसान का नाम

  • मोबाइल नंबर

  • बैंक विवरण

  • खेत का खसरा या सर्वे नंबर

  • अधिसूचित फसल

  • प्रभावित क्षेत्र

  • नुकसान की तारीख और समय

  • घटना का प्रकार

  • फसल की वर्तमान अवस्था

  • फोटो और वीडियो

  • जियोटैग तस्वीर, जहां आवश्यक हो

सूचना देने के बाद शिकायत या Intimation Number जरूर सुरक्षित रखें।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्लेम कैसे मिलता है?

फसल बीमा क्लेम का तरीका नुकसान के प्रकार पर निर्भर करता है।

क्षेत्र आधारित उपज दावा

व्यापक उपज नुकसान के मामलों में फसल कटाई प्रयोग और उपज आंकड़ों के आधार पर अधिसूचित बीमा इकाई की वास्तविक उपज तय की जाती है।

यदि वास्तविक उपज निर्धारित सीमा उपज से कम रहती है, तो दावा अनुपात के अनुसार गणना की जा सकती है।

सामान्य गणना इस प्रकार समझी जा सकती है:

दावा = (सीमा उपज – वास्तविक उपज) ÷ सीमा उपज × बीमित राशि

यह केवल सरल समझ के लिए है। अंतिम दावा पोर्टल, राज्य डेटा, बीमा नियम और लागू तकनीकी प्रक्रिया से तय होगा।

स्थानीय और पोस्ट-हार्वेस्ट दावा

ऐसे मामलों में किसान की समय पर सूचना के बाद खेत स्तर पर सर्वे किया जा सकता है।

सर्वे टीम नुकसान का प्रतिशत, फसल क्षेत्र, फसल अवस्था और घटना की पुष्टि करती है। इसके बाद पात्र दावा निर्धारित किया जाता है।

भुगतान कैसे मिलता है?

स्वीकृत क्लेम राशि किसान के सत्यापित बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजी जा सकती है।

बैंक खाता बंद, निष्क्रिय या गलत होने पर भुगतान अटक सकता है। इसलिए आवेदन के समय बैंक विवरण सही रखना जरूरी है।

2026 में उत्तर प्रदेश का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूरे प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

यह व्यवस्था खरीफ 2026 और रबी 2026-27 की फसलों के लिए लागू किए जाने की घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि, अत्यधिक वर्षा और अन्य प्राकृतिक या मौसम आधारित नुकसान से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है।

उत्तर प्रदेश के किसानों को फसल और जिले की अधिसूचना, बीमा कंपनी, आवेदन अंतिम तिथि तथा प्रति हेक्टेयर प्रीमियम के लिए राज्य कृषि विभाग की विस्तृत अधिसूचना देखनी चाहिए।

कैबिनेट मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि हर फसल और हर खेत स्वतः बीमित हो गया है। किसान को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंजीकरण और प्रीमियम भुगतान पूरा करना होगा।

राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026 के नए नियम

राजस्थान में खरीफ 2026 और रबी 2026-27 के लिए कई महत्वपूर्ण राज्य-स्तरीय निर्देश रिपोर्ट किए गए हैं।

गलत फसल विवरण के लिए बैंक की जवाबदेही

राजस्थान से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार बैंक और वित्तीय संस्थानों को किसान की भूमि, वास्तविक बोई गई या प्रस्तावित फसल, KCC और अन्य विवरण राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर सही दर्ज करने की जिम्मेदारी दी गई है।

केवल किसान क्रेडिट कार्ड में दर्ज पुरानी फसल के आधार पर स्वतः पॉलिसी जारी नहीं की जानी चाहिए। किसान की जानकारी और सहमति के बाद फसल विवरण की पुष्टि की जानी चाहिए।

यदि बैंक या संस्था की गलती से फसल या भूमि का गलत विवरण दर्ज होता है और बाद में क्लेम विवाद उत्पन्न होता है, तो संबंधित संस्था की जवाबदेही तय की जा सकती है।

यह राजस्थान का राज्य-विशिष्ट 2026 निर्देश है। इसे पूरे भारत में लागू सामान्य नियम के रूप में प्रस्तुत नहीं करना चाहिए।

राजस्थान की अंतिम तिथि 16 अगस्त 2026

रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में खरीफ 2026 फसल बीमा आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 16 अगस्त 2026 की गई है। किसान राष्ट्रीय पोर्टल, बैंक, सहकारी समिति, CSC या अधिकृत संस्था से आवेदन कर सकते हैं।

किसान आवेदन करने से पहले अपने जिले की नवीनतम आधिकारिक सूचना जांचें, क्योंकि आगे संशोधन संभव है।

41 जिलों को आठ क्लस्टरों में बांटा गया

राजस्थान की नवीन निविदा से संबंधित जानकारी के अनुसार राज्य के 41 जिलों को आठ बीमा क्लस्टरों में बांटा गया है। एक बीमा कंपनी को अधिकतम दो क्लस्टर आवंटित किए जाने का प्रावधान है।

इसका उद्देश्य बीमा कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना और एक ही कंपनी पर अत्यधिक निर्भरता कम करना बताया गया है।

सात दिन में पॉलिसी देना जरूरी

राजस्थान की नई निविदा रिपोर्ट में बीमा कंपनी के लिए पॉलिसी जारी होने के सात दिनों के भीतर किसान को उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है।

किसान को पॉलिसी मिलते ही फसल, भूमि क्षेत्र, बैंक खाता और प्रीमियम जांचना चाहिए।

सर्वे और दावा भुगतान में देरी पर दंड

रिपोर्ट के अनुसार पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान में 48 घंटे के भीतर सर्वेयर नियुक्त नहीं करने या समय पर सर्वे न करने पर दंड का प्रावधान किया गया है।

दावा भुगतान में देरी पर बीमा कंपनी को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना पड़ सकता है। सर्वे रिपोर्ट की एक प्रति किसान को देने का प्रावधान भी बताया गया है।

ये प्रावधान राजस्थान की 2026 निविदा व्यवस्था से संबंधित हैं।

मध्य प्रदेश PMFBY खरीफ 2026 अपडेट

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले से संबंधित कृषि विभाग की सूचना के अनुसार खरीफ 2026 की अधिसूचित फसलों का बीमा कराने की अंतिम तिथि 15 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।

सूचना में सोयाबीन, मक्का, तुअर और कपास के प्रीमियम का उल्लेख किया गया है। आवेदन संबंधित बैंक, CSC या आधिकारिक PMFBY पोर्टल से किया जा सकता है।

यह तारीख मध्य प्रदेश की संबंधित अधिसूचना का हिस्सा है। अन्य राज्यों में अंतिम तिथि अलग हो सकती है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में तकनीक का उपयोग

PMFBY को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए डिजिटल तथा रिमोट सेंसिंग तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।

इनमें शामिल हो सकते हैं:

  • National Crop Insurance Portal

  • Crop Insurance App

  • सैटेलाइट इमेज

  • ड्रोन

  • जियोटैग फोटो

  • रिमोट सेंसिंग

  • मोबाइल आधारित फसल कटाई डेटा

  • YES-TECH

  • WINDS

  • Crop Loss Assessment Platform

आधिकारिक PMFBY पोर्टल पर Farmer App, AIDE, CCE, CLAP और WINDS जैसे डिजिटल टूल सूचीबद्ध हैं।

राजस्थान की नई निविदा में गेहूं और सोयाबीन के उपज आकलन में फसल कटाई प्रयोग तथा YES-TECH आधारित डेटा को 50:50 भार देने की रिपोर्ट है। अन्य चयनित फसलों में भविष्य में 70:30 अनुपात अपनाया जा सकता है।

तकनीक का उद्देश्य मानव हस्तक्षेप कम करना, फसल क्षेत्र सत्यापित करना और नुकसान का वैज्ञानिक आकलन करना है। फिर भी किसान को स्वयं अपने आवेदन और फसल विवरण की जांच करनी चाहिए।

किन स्थितियों में फसल बीमा क्लेम नहीं मिल सकता?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हर प्रकार के नुकसान को कवर नहीं करती।

निम्न स्थितियों में क्लेम अस्वीकृत या प्रभावित हो सकता है:

  • फसल अधिसूचित नहीं थी।

  • किसान ने अंतिम तिथि तक आवेदन नहीं किया।

  • प्रीमियम सफलतापूर्वक जमा नहीं हुआ।

  • आवेदन में दूसरी फसल दर्ज थी।

  • भूमि या क्षेत्र का रिकॉर्ड गलत था।

  • स्थानीय नुकसान की सूचना समय पर नहीं दी गई।

  • नुकसान अधिसूचित जोखिम के अंतर्गत नहीं था।

  • फसल काटकर सुरक्षित स्थान पर रखी गई थी, लेकिन पोस्ट-हार्वेस्ट कवर की शर्तें पूरी नहीं थीं।

  • चोरी, दंगा, जानबूझकर नुकसान या अन्य अपवर्जित घटना थी।

  • खेत घरेलू या जंगली जानवर से प्रभावित हुआ, लेकिन राज्य ने Add-on Cover अधिसूचित नहीं किया था।

  • बैंक खाता या किसान पहचान सत्यापित नहीं हुई।

आधिकारिक FAQ में युद्ध, परमाणु जोखिम, दंगा, दुर्भावनापूर्ण नुकसान, चोरी और पालतू या जंगली जानवरों से नुकसान को मूल अपवर्जन में शामिल किया गया है। हालांकि खरीफ 2026 से राज्य-अधिसूचित Add-on Cover के अंतर्गत जंगली जानवरों का नुकसान शामिल किया जा सकता है।

आवेदन करते समय किसान किन गलतियों से बचें?

वास्तविक फसल से अलग नाम दर्ज न होने दें

फसल की पुष्टि स्वयं करें। पॉलिसी में गेहूं दर्ज है और खेत में चना बोया गया है तो क्लेम विवाद हो सकता है।

क्षेत्रफल गलत न भरें

बीमित क्षेत्र वास्तविक खेती क्षेत्र से मेल खाना चाहिए।

खाली फॉर्म पर हस्ताक्षर न करें

बैंक, CSC या एजेंट को खाली आवेदन न दें। अंतिम विवरण देखकर ही सहमति दें।

रसीद के बिना भुगतान न करें

प्रीमियम भुगतान की आधिकारिक रसीद जरूर लें।

पॉलिसी डाउनलोड करें

केवल खाते से पैसा कट जाने को बीमा पूरा होना न मानें।

मोबाइल नंबर सक्रिय रखें

बीमा कंपनी और पोर्टल से आने वाले संदेश पढ़ें।

नुकसान की सूचना में देरी न करें

घटना होने पर 72 घंटे के अंदर उपलब्ध माध्यम से सूचना दें।

PMFBY शिकायत कहां करें?

किसान निम्न माध्यमों से सहायता प्राप्त कर सकता है:

  • PMFBY हेल्पलाइन: 14447

  • आधिकारिक PMFBY पोर्टल

  • Krishi Rakshak Portal

  • संबंधित बीमा कंपनी

  • बैंक शाखा

  • जिला कृषि अधिकारी

  • CSC केंद्र

  • जिला या राज्य स्तरीय शिकायत समिति

आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने और फसल नुकसान रिपोर्ट करने के लिए Krishi Rakshak Portal and Helpline उपलब्ध है।

शिकायत दर्ज करते समय आवेदन संख्या, पॉलिसी नंबर, बैंक रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट और संबंधित दस्तावेज तैयार रखें।

महत्वपूर्ण बाहरी लिंक

नीचे दिए गए लिंक किसानों और पाठकों के लिए उपयोगी हैं:

किसी भी आवेदन या भुगतान के लिए पहले आधिकारिक पोर्टल को प्राथमिकता दें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या है?

यह अधिसूचित फसल को प्राकृतिक आपदा, प्रतिकूल मौसम, कीट, रोग और अन्य अधिसूचित जोखिम से होने वाले नुकसान पर पात्र किसान को वित्तीय सुरक्षा देने वाली सरकारी समर्थित बीमा योजना है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कितना प्रीमियम देना होता है?

खरीफ खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए अधिकतम 2 प्रतिशत, रबी के लिए 1.5 प्रतिशत तथा वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए अधिकतम 5 प्रतिशत किसान प्रीमियम निर्धारित है।

क्या PMFBY सभी किसानों के लिए अनिवार्य है?

नहीं। वर्ष 2020 के संशोधन के बाद योजना में किसानों की भागीदारी स्वैच्छिक है।

क्या KCC किसान का बीमा अपने आप हो जाएगा?

किसान को अपने बैंक से बीमा स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए। राजस्थान के 2026 निर्देशों में किसान की सहमति और वास्तविक फसल की पुष्टि के बिना पॉलिसी जारी न करने की बात कही गई है।

क्या बटाईदार किसान आवेदन कर सकता है?

अधिसूचना में पात्र होने पर बटाईदार या किरायेदार किसान निर्धारित खेती, अनुबंध और बुआई प्रमाण के साथ आवेदन कर सकता है।

फसल खराब होने के कितने समय के अंदर सूचना देनी चाहिए?

स्थानीय या व्यक्तिगत नुकसान की सूचना सामान्यतः घटना के 72 घंटे के अंदर Crop Insurance App, हेल्पलाइन, बीमा कंपनी, बैंक या कृषि अधिकारी को देनी चाहिए।

कटाई के बाद नुकसान पर बीमा मिलता है?

अधिसूचित फसल को खेत में कट एंड स्प्रेड स्थिति में सुखाने के दौरान चक्रवाती या बेमौसम बारिश से नुकसान होने पर कटाई के बाद अधिकतम 14 दिनों तक कवर उपलब्ध हो सकता है।

क्या जंगली जानवर से फसल नुकसान कवर होगा?

खरीफ 2026 से राज्य द्वारा अधिसूचित क्षेत्रों में जंगली जानवरों के हमले को Add-on Cover के रूप में शामिल किया जा सकता है। राज्य को जानवर और प्रभावित क्षेत्र अधिसूचित करना होगा।

PMFBY हेल्पलाइन नंबर क्या है?

आधिकारिक पोर्टल पर Krishi Rakshak Helpline नंबर 14447 दिया गया है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अंतिम तारीख क्या है?

इसकी कोई एक राष्ट्रीय अंतिम तारीख नहीं है। मध्य प्रदेश की संबंधित खरीफ 2026 सूचना में 15 अगस्त और राजस्थान की रिपोर्ट में 16 अगस्त 2026 तक आवेदन की जानकारी है। अपने राज्य की नवीनतम अधिसूचना जरूर देखें।

क्लेम का पैसा कहां आता है?

स्वीकृत बीमा दावा सत्यापित किसान बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा जाता है।

आवेदन की स्थिति कैसे जांचें?

आधिकारिक PMFBY पोर्टल पर Application Status सुविधा से पॉलिसी या आवेदन विवरण के आधार पर स्थिति जांची जा सकती है।

गलत फसल दर्ज हो गई है तो क्या करें?

तुरंत संबंधित बैंक, CSC, बीमा कंपनी और कृषि विभाग से संपर्क करके लिखित सुधार अनुरोध दें। पॉलिसी और आवेदन की कॉपी सुरक्षित रखें।

निष्कर्ष

प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना 2026 किसानों के लिए प्राकृतिक आपदाओं और उत्पादन जोखिमों से आर्थिक सुरक्षा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। कम किसान प्रीमियम पर अधिसूचित फसल के लिए व्यापक जोखिम कवर उपलब्ध कराया जा सकता है, लेकिन योजना का लाभ लेने के लिए सही समय पर आवेदन, वास्तविक फसल विवरण, भूमि रिकॉर्ड, प्रीमियम भुगतान और नुकसान की त्वरित सूचना जरूरी है।

किसान को यह नहीं मानना चाहिए कि बैंक खाते से प्रीमियम कटने के बाद प्रक्रिया पूरी हो गई। पॉलिसी डाउनलोड करके फसल का नाम, क्षेत्रफल, बीमित राशि और बैंक विवरण जांचना चाहिए।

2026 में उत्तर प्रदेश ने पूरे राज्य में योजना लागू करने का निर्णय लिया है। राजस्थान में बैंक और बीमा कंपनी की जवाबदेही, किसान की सहमति, आठ बीमा क्लस्टर, समयबद्ध सर्वे और देरी पर दंड जैसे प्रावधान सामने आए हैं। मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में खरीफ फसलों के बीमा के लिए 15 अगस्त 2026 तक की सूचना दी गई है। ये सभी राज्य-विशिष्ट अपडेट हैं और इन्हें पूरे देश के लिए समान नियम नहीं समझना चाहिए।

किसान आवेदन करने से पहले अपने राज्य कृषि विभाग, बैंक और आधिकारिक PMFBY पोर्टल पर नवीनतम जानकारी सत्यापित करें। फसल नुकसान की स्थिति में 72 घंटे के भीतर सूचना दें और शिकायत संख्या सुरक्षित रखें।